हिमालय पर मंडरा रहा बड़ी आपदा का खतरा, वैज्ञानिकों ने चेताया

हिंदुकुश हिमालय में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका असर सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह पर्वतीय क्षेत्र भारत, नेपाल, भूटान, चीन समेत कई देशों में फैला हुआ है।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में करीब 40 हजार ग्लेशियर हैं, लेकिन पर्याप्त निगरानी सीमित संख्या में ही हो पा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हर ग्लेशियर की निगरानी संभव नहीं होने के कारण उन इलाकों को प्राथमिकता देने की जरूरत है, जहां नीचे आबादी, कस्बे या बड़े बांध मौजूद हैं।
ग्लेशियल झीलों के फटने (GLOF), भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ को प्रमुख खतरों में माना जा रहा है। रिपोर्ट में भारत की करीब 200 ग्लेशियल झीलों को संभावित रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों में बताया गया है, जिनमें 56 को बेहद संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
ICIMOD की 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक हिंदुकुश हिमालय के ग्लेशियर वर्ष 2000 के बाद पहले की तुलना में करीब दोगुनी तेजी से पिघल रहे हैं। 1990 से 2020 के बीच इस क्षेत्र के ग्लेशियरों ने अपने क्षेत्रफल और बर्फ भंडार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा खोया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार उपग्रह, सेंसर और रडार आधारित निगरानी से पहाड़ों की हलचल और ग्लेशियल झीलों में होने वाले बदलावों के शुरुआती संकेत पहचाने जा सकते हैं। हालांकि, नेपाल की हालिया आपदा पर वैज्ञानिक विश्लेषण यह भी बताता है कि मौजूदा चेतावनी प्रणालियां ग्लेशियर-चट्टान ढहने जैसी घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी के लिए अभी सीमित हैं।
विशेषज्ञों ने हिमालयी देशों के बीच डेटा साझा करने, संयुक्त निगरानी और समय रहते चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। सीमा पार बहने वाली नदियों और साझा पर्वतीय क्षेत्रों को देखते हुए आपदा जोखिम कम करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



