Nepal PM Balen Shah UN: ‘ग्लेशियर पासपोर्ट नहीं देखते’, भारत-चीन के साथ रखा बड़ा प्रस्ताव

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने हाल की नेपाल की विनाशकारी बाढ़ को जलवायु संकट से जोड़ते हुए कहा कि इसका असर किसी एक देश तक सीमित नहीं है।
बालेन शाह ने कहा कि “ग्लेशियर और बाढ़ पासपोर्ट पर वीजा लगाकर यात्रा नहीं करते।” उनका तर्क था कि जलवायु परिवर्तन सीमाओं को नहीं पहचानता और हिमालयी क्षेत्र में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव नेपाल के साथ भारत और चीन तक भी पहुंच सकता है।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने Himalayan Climate Resilience Mechanism बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत नेपाल, भारत और चीन के बीच सैटेलाइट डेटा व वैज्ञानिक विशेषज्ञता साझा करने, खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी और संयुक्त अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम को मजबूत करने की बात कही गई।
बालेन शाह ने अपने संबोधन में हाल की आपदा के बाद भारत और चीन की सहायता के लिए दोनों पड़ोसी देशों का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि नेपाल को राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के साथ-साथ भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत है।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र करीब दो अरब लोगों के लिए पानी, पारिस्थितिकी, कृषि और आजीविका का आधार है। उन्होंने हिमालय को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का क्षेत्र बनाने और जलवायु संबंधी खतरों के लिए सीमा-पार तैयारी व समन्वय बढ़ाने की अपील की।



