अमेरिकी सेना की मौजूदगी खत्म होने का असर सिर्फ इराक-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं है। इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। Reuters के अनुसार, अमेरिकी सैन्य मौजूदगी हटने से ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के लिए इराक की सुरक्षा और राजनीतिक व्यवस्था में प्रभाव बढ़ाने की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि इसे ईरान की प्रत्यक्ष जीत के रूप में देखना एक विश्लेषणात्मक निष्कर्ष होगा, न कि कोई औपचारिक सरकारी परिणाम।
ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया लंबे समय से अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी का विरोध करते रहे हैं। कुछ समूहों ने अमेरिकी वापसी को अपने लिए रणनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश किया है। दूसरी ओर, इराकी सरकार अमेरिकी वापसी को राष्ट्रीय संप्रभुता और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के कदम के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।
इस बदलाव के साथ सुरक्षा को लेकर कुछ चिंताएं भी बनी हुई हैं। इराकी और कुर्द अधिकारियों ने ISIS की स्लीपर सेल, खुफिया सहयोग में कमी और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों की वापसी के बावजूद इराक के साथ प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग जारी रहेगा।
अमेरिका की सैन्य वापसी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसका मतलब इराक से अमेरिकी संबंधों का पूरी तरह खत्म होना नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में दोनों देशों के संबंध सैन्य तैनाती के बजाय प्रशिक्षण, खुफिया सहयोग, कूटनीति, ऊर्जा और आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित हो सकते हैं।