जापानी भिक्षु की 12 साल की कठोर तपस्या

सोगाकु तागुची को एनर्याकुजी मंदिर के जिशिन की भूमिका के लिए चुना गया है। इस जिम्मेदारी के तहत वह जापानी बौद्ध परंपरा के संस्थापक साइचो की समाधि की देखभाल, पूजा से जुड़ी सेवाएं और नियमित धार्मिक कार्य करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार उनकी 12 साल की एकांत साधना 11 सितंबर 2038 तक चलेगी।
माउंट हिएई जापान की तेंदाई बौद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। एनर्याकुजी मंदिर में साधना और धार्मिक अनुशासन की लंबी परंपरा रही है। सोगाकु तागुची की 12 साल की साधना इसी परंपरा से जुड़ी एक कठिन धार्मिक जिम्मेदारी के रूप में सामने आई है।
इस साधना के दौरान भिक्षु का जीवन बेहद सीमित और अनुशासित रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक वह बाहरी दुनिया की घटनाओं से दूर रहेंगे और मंदिर में निर्धारित धार्मिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उनका मुख्य दायित्व साइचो की समाधि की सेवा और देखभाल से जुड़ा रहेगा।
यह परंपरा जापान में बौद्ध साधना के उन रूपों को दर्शाती है, जिनमें लंबे समय तक अनुशासन, एकांत और धार्मिक सेवा को महत्व दिया जाता है। जापान की विभिन्न पर्वतीय धार्मिक परंपराओं में भी कठोर साधना, ध्यान और प्रकृति के बीच आध्यात्मिक अभ्यास का इतिहास रहा है।



