
संसद के मानसून सत्र के बाद एक बार फिर विशेष बैठक या संसद की अगली बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के हालिया संकेतों के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर अटकलें बढ़ी हैं। रिजिजू ने संकेत दिया है कि संसद की मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर आगे बैठक हो सकती है।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों में भी हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार की मंशा स्पष्ट करने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को सरकार की आगामी राजनीतिक और विधायी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पहले भी कह चुके हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया जल्द शुरू करना जरूरी है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाने हैं। इसके लिए निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन की प्रक्रिया अहम होगी।
परिसीमन को लेकर विपक्ष की अपनी चिंताएं हैं। खासतौर पर दक्षिणी राज्यों में यह आशंका जताई जा रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है। इसी वजह से विपक्ष सरकार से व्यापक चर्चा और सभी दलों को विश्वास में लेने की मांग कर रहा है।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों को लेकर इससे पहले भी संसद में राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला था। अप्रैल में पेश किए गए संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था। 528 सांसदों के मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे।
अब सरकार की ओर से इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों पर नजर है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की संख्या को देखते हुए सरकार की रणनीति और विपक्षी दलों के रुख दोनों महत्वपूर्ण हो गए हैं।
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव पर जल्दबाजी के बजाय सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए। वहीं, सरकार महिला आरक्षण को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहती है।
रिजिजू के ताजा संकेतों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए संसद की अगली बैठक बुलाएगी। फिलहाल विपक्ष की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।



