देवीधुरा में आठ मिनट तक खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल, CM धामी भी पहुंचे

उत्तराखंड के चंपावत जिले के देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल का आयोजन पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। मां वाराही धाम में आयोजित इस अनूठी परंपरा में आठ मिनट तक बग्वाल खेली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी देवीधुरा पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लिया।
देवीधुरा की ऐतिहासिक बग्वाल सदियों पुरानी लोक परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। मां वाराही धाम में होने वाला यह आयोजन हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। बग्वाल के दौरान चार खामों और सात थोकों के प्रतिनिधि पारंपरिक रूप से मैदान में उतरते हैं।
बग्वाल शुरू होते ही पूरा देवीधुरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच प्रतिभागियों ने एक-दूसरे पर फल और पत्थर फेंककर इस अनूठी परंपरा को निभाया। हालांकि बग्वाल की अवधि सीमित रही, लेकिन इस दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के देवीधुरा पहुंचने से आयोजन का महत्व और बढ़ गया। उन्होंने मां वाराही धाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं से भी मुलाकात की।
बग्वाल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक भी है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को स्थानीय लोग आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाते हैं।
देवीधुरा की बग्वाल उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हर साल इस आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर इस अनूठी परंपरा को करीब से देखते हैं और स्थानीय संस्कृति से परिचित होते हैं।



