1979 से 5G तक मोबाइल नेटवर्क का सफर, जानें 1G से 5G की पूरी कहानी

आज स्मार्टफोन से वीडियो कॉल, ऑनलाइन पेमेंट, स्ट्रीमिंग और इंटरनेट इस्तेमाल करना बेहद आसान है, लेकिन मोबाइल नेटवर्क यहां तक एक दिन में नहीं पहुंचा। इसके पीछे कई दशकों में विकसित हुई सेलुलर टेक्नोलॉजी की लंबी कहानी है।
मोबाइल नेटवर्क की पहली पीढ़ी यानी 1G की शुरुआत 1979 में जापान के टोक्यो से हुई। यह एनालॉग तकनीक पर आधारित थी और इसका मुख्य इस्तेमाल वॉयस कॉल के लिए किया जाता था। बाद में 1G नेटवर्क दूसरे देशों में भी पहुंचा।
इसके बाद आया 2G, जिसने मोबाइल कम्युनिकेशन को एनालॉग से डिजिटल बना दिया। 1990 के दशक में GSM जैसी तकनीकों के विस्तार के साथ कॉल की गुणवत्ता और नेटवर्क क्षमता में सुधार हुआ। इसी दौर में SMS जैसी सेवाएं भी लोकप्रिय हुईं।
3G ने मोबाइल फोन को इंटरनेट से जोड़ने का अनुभव काफी बेहतर किया। तेज डेटा कनेक्शन के कारण मोबाइल ब्राउजिंग, वीडियो कॉल और दूसरी इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने लगा। यह दौर स्मार्टफोन के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।
इसके बाद 4G ने मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार और क्षमता में बड़ा बदलाव किया। LTE जैसी तकनीकों ने हाई-स्पीड इंटरनेट को आम किया और वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग तथा दूसरी रियल-टाइम सेवाओं को ज्यादा सुविधाजनक बनाया।
साल 2019 के आसपास 5G नेटवर्क की व्यावसायिक तैनाती शुरू हुई। 5G को ज्यादा स्पीड, कम लेटेंसी और बड़ी संख्या में डिवाइस कनेक्ट करने की क्षमता के लिए विकसित किया गया है। इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन के अलावा IoT, स्मार्ट फैक्ट्री और दूसरी कनेक्टेड सेवाओं में भी बढ़ रहा है।
1G से 5G तक का सफर सिर्फ इंटरनेट की स्पीड बढ़ने की कहानी नहीं है। हर नई पीढ़ी ने मोबाइल संचार के इस्तेमाल का तरीका बदला है। एनालॉग वॉयस कॉल से शुरू हुई तकनीक आज हाई-स्पीड डेटा और कनेक्टेड डिवाइस की दुनिया तक पहुंच चुकी है।



