विश्व आदिवासी दिवस समापन पर विद्यार्थियों और कलाकारों की संस्कृति मंत्री से भेंट

विश्व आदिवासी दिवस 2025 के समापन अवसर पर विद्यार्थियों और कलाकारों का एक प्रतिनिधिमंडल संस्कृति मंत्री से विशेष भेंट के लिए पहुंचा। यह मुलाकात राजधानी में आयोजित समापन समारोह के तुरंत बाद हुई, जिसमें आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और उनके योगदान को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों और कलाकारों ने इस अवसर पर न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव भी रखे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों से आए छात्र और युवा कलाकार शामिल हुए थे, जिन्होंने आदिवासी समुदाय के पारंपरिक नृत्य, संगीत और चित्रकला को प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखा। संस्कृति मंत्री ने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति भारत की आत्मा है और इसके संरक्षण के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार भविष्य में और अधिक ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देगी, जिससे आदिवासी युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए आदिवासी भाषा, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान आकृष्ट किया। छात्रों ने मांग की कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में आदिवासी इतिहास व साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, जिससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रह सके। कलाकारों ने विशेष रूप से आदिवासी कला और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच दिलाने के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्कृति मंत्री ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की, जो आदिवासी युवाओं के कल्याण और सांस्कृतिक संवर्धन से जुड़ी योजनाओं पर काम करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी वर्षों में आदिवासी कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति का अवसर प्रदान किया जाएगा।
इस मुलाकात से छात्रों और कलाकारों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। उन्होंने सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया पर आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उनकी आवाज को न केवल सुना गया, बल्कि उस पर ठोस कार्रवाई भी की जाएगी। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और प्रसार के लिए सतत प्रयास करते रहेंगे।
इस तरह, विश्व आदिवासी दिवस का समापन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव बनकर रह गया, बल्कि यह एक सार्थक संवाद और सहयोग का माध्यम भी बना, जो भविष्य में आदिवासी समाज के विकास की दिशा तय करेगा।



