“विरासत गलियारा विवाद: विधानसभा में हंगामा, योगी और माता प्रसाद में तीखी नोकझोंक”

उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र मंगलवार को ‘विरासत गलियारा’ विवाद को लेकर गर्मा गया। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। बहुजन समाज पार्टी के नेता माता प्रसाद मौर्य ने सदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता के लोगों ने उनके ऊपर हमला किया और यह सब राजनीतिक दबाव में किया गया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश के तहत कार्रवाई की जा रही है और ‘विरासत गलियारा’ योजना के नाम पर भ्रष्टाचार और पक्षपात को बढ़ावा दिया जा रहा है।
माता प्रसाद मौर्य के आरोपों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल झूठे आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करना चाहता है। योगी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “आपके कंधे पर बंदूक रखकर कुछ लोग अपनी राजनीति साध रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ‘विरासत गलियारा’ योजना राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सहेजने के लिए है, और इसमें पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है।
सदन में यह बहस इतनी गरमाई कि विपक्षी दलों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर विकास कार्यों में रोड़े अटकाने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप मढ़ा।
विरासत गलियारा योजना का उद्देश्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण करना है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिले और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि इस योजना में टेंडर और ठेके देने में अनियमितताएं हो रही हैं और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को अनदेखा किया जा रहा है।
माता प्रसाद मौर्य का आरोप है कि उनके विरोध के चलते उन पर व्यक्तिगत हमले किए गए, और यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सदन से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी कि बिना सबूत के लगाए गए आरोप न केवल गलत हैं बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ भी हैं।
पूरा मामला अब मीडिया की सुर्खियों में है और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘विरासत गलियारा’ विवाद केवल सदन की बहस तक सीमित रहता है या फिर यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरता है।



