“‘फूट डालो, राज करो’ सपा-कांग्रेस की नीति: फतेहपुर घटना पर अखिलेश के बयान पर डिप्टी सीएम का पलटवार”
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। फतेहपुर की हालिया घटना पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अखिलेश ने इस मामले में सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है और सरकार जनता की सुरक्षा में नाकाम साबित हो रही है।
अखिलेश के इस बयान पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस की राजनीति का असली चेहरा ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर समाज में वैमनस्य फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करता है। डिप्टी सीएम ने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने कार्यकाल में जनता के विकास की बजाय जातिगत और धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने का काम किया।
केशव प्रसाद मौर्य ने फतेहपुर की घटना पर सपा को घेरते हुए कहा कि अखिलेश यादव को न तो पीड़ित परिवार की चिंता है और न ही न्याय की। उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक फायदा उठाना है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने घटना के तुरंत बाद कार्रवाई की है, दोषियों की गिरफ्तारी हुई है और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दी जा रही है।
डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं को जनता के बीच झूठ और भ्रम फैलाने से पहले अपने कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि सपा शासन में अपराध चरम पर था और कानून-व्यवस्था बदहाल थी, जबकि वर्तमान सरकार ने अपराध पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
फतेहपुर की घटना को लेकर यह राजनीतिक तकरार सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा के समर्थक इसे विपक्ष की अवसरवादी राजनीति बता रहे हैं, वहीं सपा और कांग्रेस इसे सरकार की नाकामी के तौर पर पेश कर रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा सरकार का एजेंडा विकास, सुशासन और पारदर्शिता है, जबकि सपा और कांग्रेस का एजेंडा केवल सत्ता हासिल करने के लिए समाज में विभाजन पैदा करना है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसे नेताओं के बहकावे में न आएं और प्रदेश के विकास में सहयोग दें।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुद्दों से ज्यादा बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर हावी है। फतेहपुर की घटना अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा न रहकर एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गई है, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति के तहत इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद और कितना आगे बढ़ता है और इसका असर प्रदेश की सियासत पर कितना पड़ता है।



