
आयरलैंड में हाल ही में भारतीयों पर बढ़ते हमलों ने प्रवासी समुदाय में चिंता की लहर पैदा कर दी है। खासकर भारतीय नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमलों के मामलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। डबलिन और उसके आस-पास के क्षेत्रों में बीते कुछ महीनों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें भारतीय मूल के लोगों को नस्लीय टिप्पणियों, मारपीट और धमकियों का सामना करना पड़ा है। ताजा मामला एक भारतीय नर्स के साथ मारपीट का है, जिसने प्रवासी समुदाय को गुस्से और चिंता में डाल दिया है। इसके बाद आयरलैंड में कार्यरत भारतीय नर्सों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे विरोध प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार करने के लिए मजबूर होंगी।
भारतीय नर्सें लंबे समय से आयरलैंड के स्वास्थ्य क्षेत्र की रीढ़ मानी जाती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने फ्रंटलाइन पर रहकर सेवा दी थी। इसके बावजूद, हाल के हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वहां की सरकार प्रवासी स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कितनी गंभीर है। नर्सिंग यूनियनों और भारतीय संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि लगातार हो रहे हमलों के पीछे नस्लीय भेदभाव की मानसिकता भी जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
भारतीय समुदाय ने सोशल मीडिया पर भी एकजुट होकर आवाज उठाई है। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #ProtectIndianNurses और #StopAttacksOnIndians जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई प्रवासी भारतीय संगठनों ने आयरलैंड के प्रधानमंत्री और पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर सुरक्षा बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा का ही मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और बहुसांस्कृतिक मूल्यों पर भी चोट करते हैं। यदि सरकार और प्रशासन इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं करते, तो इससे न केवल भारतीय समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ेगी, बल्कि आयरलैंड की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
भारतीय दूतावास ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। दूतावास ने भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता बरतने और किसी भी घटना की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी है।
अब देखना यह है कि आयरलैंड सरकार इन चेतावनियों और विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। फिलहाल भारतीय समुदाय का साफ संदेश है कि उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अगर जरूरत पड़ी तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए भी तैयार हैं।



