अयोध्या के 500 मंदिरों में जन्माष्टमी उत्सव: रामजन्मभूमि-रामदरबार सहित धूमधाम से मना महापर्व

अयोध्या नगरी इस समय जन्माष्टमी के पावन महापर्व की भव्य तैयारियों में डूबी हुई है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर पूरे शहर में उल्लास और भक्ति का वातावरण है। शनिवार से शुरू हुआ यह महापर्व अयोध्या के लगभग 500 मंदिरों में धूमधाम से मनाया जा रहा है। रामजन्मभूमि परिसर, रामदरबार और हनुमानगढ़ी जैसे प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और रोशनी से सजाकर स्वर्गिक रूप दिया गया है। भक्तगण सुबह से ही पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन में लीन होकर अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं।
रामजन्मभूमि पर विशेष आरती और झांकी का आयोजन किया गया, जिसमें श्रीकृष्ण के बालरूप के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं, रामदरबार मंदिर में भक्तों ने परंपरागत तरीके से झूला झुलाकर लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाया। रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के साथ ही मंदिरों में घंटा-घड़ियाल और शंखनाद से वातावरण गूंज उठा। इस दौरान पूरा अयोध्या नगर “जय श्रीकृष्ण” और “हरे कृष्ण हरे राम” के जयघोष से आकाशवाणी करने लगा।
शहर की गलियों से लेकर घाटों तक रंग-बिरंगी रोशनियों और पुष्प सज्जा ने पर्व की शोभा को और बढ़ा दिया है। अयोध्या में बाहर से आए हजारों श्रद्धालु भी इस महापर्व के साक्षी बने और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। जन्माष्टमी पर आयोजित रासलीला, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भक्तिमय वातावरण को और जीवंत कर दिया।
अयोध्या के संतों और पुजारियों ने जन्माष्टमी के अवसर पर संदेश दिया कि यह पर्व केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं बल्कि धर्म, सत्य और प्रेम की विजय का प्रतीक है। पूरे नगर में फैला उल्लास, भक्ति और आस्था यह दर्शाता है कि अयोध्या की धरती आज भी सनातन संस्कृति और परंपरा की अद्भुत धरोहर को संजोए हुए है।



