दिल्ली में योगी सरकार के तीन बड़े क्षत्रपों का मेल-मिलाप, लखनऊ में बढ़ेगा सियासी ताप

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर बदलते समीकरण हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं। खासकर तब, जब सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच रणनीतिक बैठकों और मेल-मिलाप की खबरें सामने आती हैं। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में योगी सरकार के तीन बड़े क्षत्रप—आशीष पटेल (अपना दल), संजय निषाद (निषाद पार्टी) और ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा)—एक मंच पर नजर आए। यह मुलाकात न सिर्फ भाजपा की भावी रणनीति को मजबूती देने के संकेत देती है, बल्कि आने वाले दिनों में लखनऊ की राजनीति में गर्मी भी बढ़ाने वाली है।
ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की राजनीति यूपी में बेहद अहम मानी जाती है। भाजपा ने 2014 से लेकर 2024 तक के चुनावों में इसी समीकरण का लाभ उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भाजपा ने बार-बार ओबीसी नेताओं और दलों को साथ जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत की। ऐसे में आशीष पटेल, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर का एक मंच पर आना भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत है।
राजभर, जो कभी भाजपा से अलग होकर विपक्षी खेमे में गए थे, हाल ही में फिर से एनडीए का हिस्सा बने। उनकी राजनीतिक पकड़ पूर्वांचल में काफी मजबूत मानी जाती है। वहीं, निषाद पार्टी के संजय निषाद की जातिगत राजनीति भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में निर्णायक साबित होती रही है। आशीष पटेल की पार्टी ‘अपना दल’ लंबे समय से भाजपा की सहयोगी रही है और कुर्मी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ है। इन तीनों का एक साथ आना भाजपा के लिए ‘ओबीसी महागठबंधन’ जैसा है, जो विपक्ष की चुनौती को और मुश्किल बना सकता है।
दिल्ली में हुई इस बैठक को सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात मानना सही नहीं होगा। इसके पीछे साफ संदेश है कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अपने सभी सहयोगियों को एकजुट करना चाहती है। विपक्ष जहां महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं भाजपा ओबीसी, दलित और पिछड़े वर्ग को साधकर अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत करना चाहती है।
इस मुलाकात के बाद लखनऊ की राजनीति में तापमान और बढ़ना तय है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियां पहले से ही ओबीसी वोट बैंक को साधने की कवायद कर रही हैं। अखिलेश यादव लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और राहुल गांधी भी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। लेकिन भाजपा का यह कदम विपक्ष की रणनीति को बड़ा झटका दे सकता है।
कुल मिलाकर, दिल्ली में हुआ यह मेल-मिलाप उत्तर प्रदेश की सियासत का नया समीकरण गढ़ने वाला साबित हो सकता है। आशीष पटेल, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर जैसे क्षत्रप अगर भाजपा के साथ मजबूती से खड़े होते हैं, तो यह विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। आने वाले दिनों में इस मुलाकात के असर से लखनऊ की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प हो जाएगी, क्योंकि यह चुनावी मैदान में भाजपा की बढ़त का संकेत भी माना जा रहा है।



