
इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज़ होता दिख रहा है। गाज़ा में चल रहे सैन्य अभियानों और हमलों के बीच अब इजरायल के भीतर जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। हजारों लोग राजधानी तेल अवीव और अन्य शहरों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है ताकि बंधकों की रिहाई सुनिश्चित हो सके। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार उन नागरिकों को मुक्त कराने में नाकाम रही है जिन्हें हमास ने युद्ध की शुरुआत में अगवा कर लिया था। इस आक्रोश के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान दिया है।
नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा कि हमास के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। उनके अनुसार हमास न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की शांति के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि इजरायल बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही हमास की ताकत को कमजोर करना बेहद ज़रूरी है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल पर दबाव बढ़ रहा है कि वह युद्धविराम करे और मानवीय संकट को कम करने की दिशा में कदम उठाए।
वहीं, प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि लगातार बमबारी और सैन्य कार्रवाई से आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ रही है और बंधकों की जान को भी नुकसान पहुंच सकता है। उनका मानना है कि सरकार को आक्रामक नीति के बजाय कूटनीति और वार्ता पर जोर देना चाहिए। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में बंधकों के परिजन भी शामिल हुए जिन्होंने भावुक अपील करते हुए सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की।
गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच यह संघर्ष केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी मुद्दा बन चुका है। गाज़ा में लगातार हो रहे हमलों से हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और वहां की स्थिति दिन-ब-दिन भयावह होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और शांति बहाली की अपील की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इजरायल की राजनीति को भी हिला दिया है। विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि वह बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए ठोस रणनीति बनाने में विफल रही है। वहीं सरकार का कहना है कि बिना हमास को कमजोर किए न तो शांति संभव है और न ही बंधकों की सुरक्षित रिहाई। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नेतन्याहू की यह आक्रामक नीति इजरायल की जनता का भरोसा जीत पाती है या फिर प्रदर्शन और विरोध आंदोलन और अधिक तेज़ हो जाते हैं।



