
भारत सरकार लगातार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर कदम बढ़ा रही है ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके और आयातित पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता घटाई जा सके। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि देश में हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों के लिए 10 प्रमुख राजमार्ग खंडों की पहचान कर ली गई है। यह निर्णय भारत को ग्रीन एनर्जी और सतत परिवहन प्रणाली की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाले वाहन न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे बल्कि इनके संचालन से परिवहन लागत में भी भारी कमी आएगी। वर्तमान में देश में डीजल और पेट्रोल से चलने वाले भारी वाहन प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोतों में गिने जाते हैं। ऐसे में यदि इनकी जगह हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक इस्तेमाल किए जाएं तो कार्बन उत्सर्जन में अभूतपूर्व कमी आएगी और भारत 2070 तक “नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन” लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
सरकार ने जिन 10 राजमार्ग खंडों की पहचान की है, वे प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक मार्गों को जोड़ते हैं। इन सड़कों पर हाइड्रोजन ट्रकों के लिए चार्जिंग और रीफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी और देश के परिवहन ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
हाइड्रोजन को “फ्यूल ऑफ द फ्यूचर” कहा जाता है क्योंकि यह जलने पर केवल पानी और भाप उत्सर्जित करता है। यह प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत है और इसमें डीजल या पेट्रोल की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा क्षमता होती है। गडकरी का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत हाइड्रोजन उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा और यहां तैयार ग्रीन हाइड्रोजन से परिवहन क्षेत्र में क्रांति आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से भारत न केवल स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अग्रसर होगा बल्कि आयातित ईंधन पर खर्च होने वाले अरबों डॉलर की बचत भी कर पाएगा। इसके साथ ही हाइड्रोजन आधारित ट्रकों का बड़े पैमाने पर उपयोग होने से देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर को नई दिशा मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सरकार की यह रणनीति साफ दर्शाती है कि आने वाले समय में भारत परिवहन क्षेत्र को हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा से संचालित करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत न केवल प्रदूषण नियंत्रण में एक उदाहरण बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी ट्रांसपोर्ट मॉडल प्रस्तुत करेगा।



