
हाल ही में अजरबैजान के राष्ट्रपति ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भारत, पाकिस्तान से अजरबैजान के गहरे संबंधों का बदला लेने के लिए उसके खिलाफ कूटनीतिक कदम उठा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने अजरबैजान की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में एंट्री को रोक दिया है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और भारत-अजरबैजान रिश्तों में कड़वाहट साफ झलकने लगी है।
दरअसल, अजरबैजान और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक और सैन्य संबंध गहरे हुए हैं। पाकिस्तान ने न केवल अजरबैजान को सैन्य सहयोग दिया है, बल्कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापारिक साझेदारी भी मजबूत हुई है। दूसरी ओर, भारत और पाकिस्तान के रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में भारत को यह लगता है कि अजरबैजान की नीतियां अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को समर्थन देती हैं। इसी वजह से भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अजरबैजान के प्रभाव को सीमित करने की रणनीति अपनाई है।
SCO (Shanghai Cooperation Organisation) एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, मध्य एशियाई देश और अन्य सदस्य शामिल हैं। यह संगठन न केवल आर्थिक सहयोग बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा और आतंकवाद निरोधी साझेदारी पर भी फोकस करता है। अजरबैजान की इसमें सदस्यता से पाकिस्तान को कूटनीतिक लाभ मिल सकता था, क्योंकि वह एक और करीबी सहयोगी देश के साथ इस मंच पर मजबूत स्थिति बना पाता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए अजरबैजान की एंट्री पर रोक लगा दी।
भारत का रुख यह भी बताता है कि वह किसी भी ऐसे देश को क्षेत्रीय मंचों पर मजबूती नहीं देना चाहता, जो पाकिस्तान के साथ खुलेआम रणनीतिक रिश्ते रखता हो। भारत का मानना है कि अजरबैजान का रवैया दक्षिण एशियाई सुरक्षा ढांचे के लिए संतुलित नहीं है। वहीं, अजरबैजान के राष्ट्रपति का आरोप है कि भारत अपने “पाकिस्तान विरोधी रुख” को कूटनीतिक फैसलों में शामिल कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना के खिलाफ है।
इस घटनाक्रम से साफ है कि आने वाले समय में भारत-अजरबैजान संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। जहां एक ओर भारत अपनी विदेश नीति में “राष्ट्रीय हित सर्वोपरि” के सिद्धांत पर कायम है, वहीं अजरबैजान अपने रणनीतिक साझेदार पाकिस्तान को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा। यह विवाद केवल दोनों देशों के बीच ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन पर असर डाल सकता है।
अंततः, यह मामला दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में रिश्ते केवल आर्थिक या सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि भू-राजनीतिक हित और साझेदारी तय करते हैं कि कौन सा देश किस मंच पर कितना आगे बढ़ेगा। SCO सदस्यता विवाद इसका ताजा उदाहरण है, जिसमें भारत ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए अजरबैजान की राह में रुकावट डाली।



