
दक्षिण एशिया की राजनीति इस समय जिस दौर से गुजर रही है, उसमें युवाओं की भूमिका सबसे अहम हो गई है। खासतौर पर Gen-Z (1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) ने पिछले कुछ वर्षों में यह साबित कर दिया है कि उनकी आवाज को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता। श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तनों के पीछे इस पीढ़ी का दबाव और आंदोलन एक बड़ा कारण बना। अब यही सवाल उठने लगा है कि क्या नेपाल की सरकार भी इसी संकट की ओर बढ़ रही है?
श्रीलंका में आर्थिक संकट और युवा आंदोलन
श्रीलंका में 2022 में गहराए आर्थिक संकट के खिलाफ युवाओं ने मोर्चा संभाला। महंगाई, ईंधन की किल्लत और रोजगार संकट ने जनता को सड़कों पर ला दिया। आंदोलन की सबसे मजबूत कड़ी Gen-Z ही थी, जिसने सोशल मीडिया से लेकर मैदान तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। नतीजा यह रहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा और सरकार बदल गई।
बांग्लादेश में बदलाव की मांग
बांग्लादेश में हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों ने साबित कर दिया कि नई पीढ़ी तानाशाही या एकतरफा सत्ता को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। यहां नौकरी आरक्षण नीति और राजनीतिक असमानता को लेकर युवाओं ने जबरदस्त आंदोलन किया। इस दबाव ने सत्ता के समीकरण बदलने में बड़ी भूमिका निभाई और सरकार को पीछे हटना पड़ा।
नेपाल में बढ़ते विरोध और सोशल मीडिया बैन
अब चर्चा नेपाल की है। वहां की सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बैन लगाने का फैसला किया, जिससे युवाओं और खासकर Gen-Z वर्ग में नाराजगी फैल गई है। संसद भवन के बाहर प्रदर्शन और विपक्षी दलों की आलोचना से यह साफ है कि जनता का धैर्य टूट रहा है। नेपाल की राजनीति पहले ही अस्थिर रही है और बार-बार सत्ता परिवर्तन होते रहे हैं। ऐसे में यदि युवा आंदोलन तेज होता है, तो यह सरकार के लिए संकट का संकेत हो सकता है।
Gen-Z की ताकत और बदलता राजनीतिक परिदृश्य
Gen-Z अब सिर्फ शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं रह गई है। यह पीढ़ी तकनीकी रूप से सशक्त, सोशल मीडिया पर मुखर और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग है। यही कारण है कि उनके आंदोलन सिर्फ स्थानीय नहीं रहते, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। श्रीलंका और बांग्लादेश की तरह नेपाल में भी यदि हालात काबू में नहीं आए तो सत्ता परिवर्तन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
दक्षिण एशिया में राजनीति के नए समीकरण अब युवाओं की भागीदारी पर आधारित हो रहे हैं। श्रीलंका और बांग्लादेश में यह तस्वीर साफ दिख चुकी है। नेपाल की मौजूदा स्थिति यह बताती है कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी ही होगी, वरना अगला सत्ता परिवर्तन कहीं नेपाल में न हो जाए।



