सीएम योगी बोले- दिव्यांगजनों को ईश्वर ने दिए अनेक गुण, कई बार मनवाया प्रतिभा का लोहा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में दिव्यांगजन सम्मान कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों को ईश्वर ने विशेष गुणों से नवाजा है। उन्होंने कहा कि कई बार समाज यह सोचता है कि दिव्यांगजन सामान्य जीवन नहीं जी सकते, लेकिन सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। इतिहास से लेकर वर्तमान तक ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, जिन्होंने यह साबित किया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दिव्यांगजन अपनी प्रतिभा के बल पर समाज में मिसाल कायम करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि दिव्यांगजन अपनी मानसिक शक्ति, धैर्य और अदम्य साहस के माध्यम से कई बार समाज को चकित कर देते हैं और असंभव को संभव बना दिखाते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि समाज का दायित्व है कि वह दिव्यांगजनों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करे। उनकी प्रतिभा को पहचानने और उन्हें प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार निरंतर ऐसे कदम उठा रही है, जिससे दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर मिल सकें। दिव्यांगजन केवल सहानुभूति के पात्र नहीं हैं, बल्कि वे प्रेरणा के स्रोत हैं। उनकी मेहनत और आत्मबल सामान्य लोगों के लिए भी अनुकरणीय है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में हमेशा से यह विश्वास रहा है कि प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश विद्यमान है। दिव्यांगजन भी इस सृष्टि के अद्वितीय रत्न हैं। उनकी संवेदनशीलता, दृढ़ इच्छाशक्ति और रचनात्मकता कई बार असाधारण होती है। चाहे वह खेल का क्षेत्र हो, कला हो, साहित्य हो या विज्ञान—हर जगह दिव्यांगजनों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ऐसे अनेक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के लिए पेंशन, छात्रवृत्ति, रोजगार योजनाएं और सहायक उपकरण वितरण जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की मुस्कान और आत्मविश्वास समाज के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
सीएम योगी के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट संदेश गया कि दिव्यांगजन केवल चुनौतियों का सामना करने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे समाज और राष्ट्र के लिए शक्ति और प्रेरणा के स्रोत हैं। हमें उन्हें केवल मदद का पात्र मानने के बजाय उनकी प्रतिभा को पहचानना और उसे मंच देना होगा। जब समाज उन्हें समान अवसर और सम्मान देगा, तभी सच्चे अर्थों में समावेशी विकास संभव होगा।



