
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हाल ही में अपने एक बयान में कहा कि “भारत हमारे साथ है”, जिससे अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों और अफवाहों की हवा निकल गई। जेलेंस्की ने यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का समर्थन उनके देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है और यह यूक्रेन को रणनीतिक मजबूती प्रदान करता है।
जेलेंस्की ने यूरोप के नेताओं को भी अपनी सलाह दी कि यूक्रेन के साथ स्थिर और मजबूत कूटनीतिक संबंध बनाए रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल सैन्य मदद ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक सहयोग भी यूरोप और यूक्रेन दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा। उन्होंने विशेष रूप से यूरोपीय देशों से अपील की कि वे यूक्रेन के संघर्ष में संतुलित और वास्तविक दृष्टिकोण अपनाएं।
अपने बयान में जेलेंस्की ने ट्रंप द्वारा प्रचारित कुछ गैर-सत्यापित दावों को चुनौती दी और कहा कि ऐसे दावे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भ्रम और गलतफहमी पैदा करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसे देशों का समर्थन दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर यूक्रेन अकेला नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलेंस्की का यह बयान न केवल ट्रंप के दावों को खारिज करता है, बल्कि यूरोपीय देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भी यह संदेश देता है कि यूक्रेन के साथ सहयोग जारी रखना स्थिरता और सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने यूरोप को चेताया कि आपसी मतभेद या राजनीतिक शंकाएं युद्धग्रस्त देशों के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
इस बयान के बाद यूरोप में राजनीतिक हलचल बढ़ी है और कई देशों ने संकेत दिया है कि वे यूक्रेन के लिए मदद और समर्थन को प्राथमिकता देंगे। वहीं, भारत का सहयोग और स्थिरता की भूमिका वैश्विक कूटनीति में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही है।
जेलेंस्की ने अंत में यह भी कहा कि वैश्विक सहयोग, आर्थिक सहायता और राजनीतिक समर्थन ही यूक्रेन को संघर्ष में मजबूती देंगे और क्षेत्रीय शांति बनाए रखेंगे। उनका यह स्पष्ट संदेश सभी वैश्विक नेताओं के लिए चुनौती और मार्गदर्शन दोनों है।



