
स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को इजरायल द्वारा हिरासत में लिए जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल मचा दी है। गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ के तहत समुद्र मार्ग से यात्रा कर रहे ग्रेटा और अन्य 137 कार्यकर्ताओं को इजरायली नौसेना ने गिरफ्तार किया। उनमें से कुछ ने दावा किया कि ग्रेटा के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया गया—उन्हें बाल पकड़कर घसीटा गया और जबरन इजरायली ध्वज को चुमने के लिए मजबूर किया गया। मलेशियाई कार्यकर्ता हाजवानी हेलमी और अमेरिकी कार्यकर्ता विंडफील्ड बीवर ने इस व्यवहार को “दुर्भाग्यपूर्ण” और “प्रचार के रूप में इस्तेमाल” बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में रखे गए कार्यकर्ताओं को साफ पानी, भोजन और दवाइयां नहीं दी गईं।
यह घटना इजरायल और गाजा के बीच चल रहे संघर्ष और मानवीय सहायता की आपूर्ति से जुड़े जटिल मुद्दों को उजागर करती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस घटना की निंदा की है और इजरायल से मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। स्वीडिश दूतावास और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ग्रेटा की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने की बात की है।
इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अपने कर्तव्यों का पालन करते समय इस तरह की प्रताड़ना का सामना करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।



