
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का प्रस्ताव दिया है। हाल ही में व्हाइट हाउस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई बैठक में ट्रंप ने यह सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इससे कनाडा के नागरिकों को टैक्स में कमी और सैन्य सुरक्षा में वृद्धि होगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि कई कनाडाई इस विचार का समर्थन करते हैं।
हालांकि, पीएम कार्नी ने इस प्रस्ताव को सिरे से नकारते हुए कहा कि कनाडा की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा कभी भी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। कार्नी ने यह भी कहा कि उनकी चुनावी जीत इस बात का प्रमाण है कि कनाडाई लोग अपनी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को महत्व देते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात की है। पिछले वर्ष भी उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि कई कनाडाई चाहते हैं कि उनका देश अमेरिका का 51वां राज्य बन जाए। उन्होंने यह तर्क दिया कि इससे कनाडा के नागरिकों को टैक्स में राहत और बेहतर सैन्य सुरक्षा मिलेगी।
कनाडा में ट्रंप के इस प्रस्ताव को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इसे एक मजाक के रूप में लेते हैं, जबकि कई इसे कनाडा की संप्रभुता के लिए खतरा मानते हैं। कनाडा के विभिन्न नेताओं ने ट्रंप के इस बयान की आलोचना की है और इसे अस्वीकार्य बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण से कनाडा का अमेरिका में शामिल होना लगभग असंभव है। कनाडा का संविधान किसी भी हिस्से को अमेरिका में शामिल होने की अनुमति नहीं देता है। इसके लिए कनाडा की संसद और सभी प्रांतों की विधानसभाओं की मंजूरी आवश्यक होगी, जो कि असंभव प्रतीत होता है।
अमेरिकी संविधान भी नए राज्यों को शामिल करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है। इसके अलावा, कनाडा की संप्रभुता और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह संभावना न के बराबर है।
अंततः, ट्रंप का यह प्रस्ताव एक राजनीतिक बयान के रूप में देखा जा सकता है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। कनाडा और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत और सहयोगपूर्ण हैं, और यह स्थिति भविष्य में भी बनी रहेगी।



