
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने शुक्रवार को तीन अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनका उद्देश्य सामरिक सहयोग, रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी को बढ़ाना है। इस मौके पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उपप्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच नई दिल्ली में विस्तृत वार्ता हुई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि यह साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि “भारत किसी भी प्रकार के आतंकवाद या उसके समर्थन को सहन नहीं करेगा।” राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रुख अपनाने की अपील की।
वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा अनुसंधान से जुड़े तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास बढ़ाने, तकनीकी नवाचारों के आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में साझेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया का यह सहयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश पहले से ही क्वाड समूह (Quad) के सदस्य हैं, जिसमें अमेरिका और जापान भी शामिल हैं। यह समझौते क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा दे रहा है और ऑस्ट्रेलिया के साथ यह साझेदारी दोनों देशों के लिए पारस्परिक लाभ का अवसर प्रदान करेगी। वहीं, रिचर्ड मार्ल्स ने भारत की तकनीकी क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग आने वाले वर्षों में और गहराई हासिल करेगा।



