
दिल्ली-NCR में अब ग्रीन पटाखे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि प्रदूषण और स्वास्थ्य पर असर डालने वाले पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए और केवल पर्यावरण के अनुकूल यानी ग्रीन पटाखों का ही उपयोग किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दिल्ली और आसपास के राज्यों में दिवाली और अन्य पर्वों पर पटाखों की बिक्री और जलाने के नियम और सख्त हो गए हैं।
नए नियमों के अनुसार, ग्रीन पटाखे केवल तय की गई समयावधि में ही जलाए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि पटाखे जलाने का समय सुबह और शाम निर्धारित रहेगा, जिससे धुआँ फैलने की समस्या न्यूनतम हो। इसके अलावा, अदालत ने पर्यावरण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि नाइट पैट्रोल और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा।违规 करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्रीन पटाखे जलाने वाले आयोजकों और दुकानदारों को स्थानीय प्रशासन द्वारा सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। यह कदम पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने इस फैसले के पीछे यह तर्क रखा कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पहले से ही गंभीर स्तर पर है और प्रत्येक वर्ष दिवाली के समय प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि देखी जाती है।
इस फैसले का असर न केवल दिल्ली पर बल्कि एनसीआर के आसपास के इलाकों पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करके पारंपरिक पटाखों की तुलना में वायु प्रदूषण में 70 प्रतिशत तक की कमी लाना संभव है। इसके अलावा, अदालत ने आम जनता से अपील की है कि वे केवल लाइसेंसधारी दुकानों से ग्रीन पटाखे खरीदें और निर्धारित समय और स्थान पर ही उनका इस्तेमाल करें।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह संदेश भी साफ होता है कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दिवाली जैसे त्योहारों का आनंद लेने के लिए अब हमें जिम्मेदारी के साथ ग्रीन पटाखों का उपयोग करना होगा। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद करेगा।



