
भारतीय विज्ञापन जगत के महान क्रिएटिव जीनियस और ‘एड गुरु’ कहे जाने वाले पीयूष पांडे का निधन हो गया है। उन्होंने अपने अनोखे विचारों और रचनात्मक विज्ञापनों से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। पीयूष पांडे ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) के चेयरमैन एमेरिटस थे और उनके नेतृत्व में भारतीय विज्ञापन उद्योग ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं। उनके बनाए विज्ञापन जैसे ‘फेविकोल का जोड़ है, टूटेगा नहीं’, ‘अब की बार मोदी सरकार’, ‘एशियन पेंट्स हर घर कुछ कहता है’, और ‘फेविक्विक – चुटकी में चिपकाए’ आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
राजस्थान में जन्मे पीयूष पांडे ने अपने करियर की शुरुआत क्रिकेट से की थी, लेकिन बाद में उन्होंने विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा और अपनी रचनात्मकता से इतिहास रच दिया। 1982 में उन्होंने ओगिल्वी में जॉइन किया और देखते ही देखते भारतीय बाजार के सबसे प्रभावशाली विज्ञापन विशेषज्ञों में शामिल हो गए। उनके द्वारा बनाए गए विज्ञापनों ने आम भारतीय की भावनाओं, बोलचाल और हास्य को इतनी सहजता से पेश किया कि लोग उनसे तुरंत जुड़ गए।
पीयूष पांडे को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 2016 में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म श्री’ से नवाजा था। उनकी किताब “पांडेमोनियम” विज्ञापन जगत के छात्रों और पेशेवरों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जाती है।
उनके निधन की खबर से विज्ञापन जगत, बॉलीवुड और राजनीतिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कई उद्योगपतियों और कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। वे न केवल एक महान क्रिएटिव डायरेक्टर थे, बल्कि एक सादगीपूर्ण और हंसमुख इंसान के रूप में भी जाने जाते थे।
पीयूष पांडे की विरासत उनके बनाए विज्ञापनों, उनके शब्दों और उनके विचारों में हमेशा जिंदा रहेगी। उन्होंने भारतीय विज्ञापन को सिर्फ एक व्यावसायिक माध्यम नहीं, बल्कि एक कला का रूप दिया। उनका जाना उद्योग के लिए एक अपूरणीय क्षति है।



