
अमेरिका में H-1B वीजा के कथित दुरुपयोग को लेकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने 175 कंपनियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने वीजा नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताएं की हैं। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उस नीति के अनुरूप है जिसके तहत अमेरिकी नौकरियों की प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों को देने की बात कही गई है।
सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने H-1B वीजा का इस्तेमाल करके अमेरिकी वेतनमान से कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया। इससे स्थानीय कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। ट्रंप ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “अमेरिका की नौकरियां अमेरिकियों के लिए हैं, और जो भी कंपनियां इस नीति के खिलाफ जाएंगी, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
H-1B वीजा मुख्य रूप से भारतीय और चीनी आईटी पेशेवरों के बीच लोकप्रिय है। हर साल हजारों भारतीय युवा इस वीजा के तहत अमेरिका में नौकरी पाने का सपना पूरा करते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में यह विवादों में घिरा रहा है क्योंकि कई कंपनियों पर सस्ते श्रमिकों की भर्ती के लिए इसका दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं।
ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि जांच के दौरान अगर किसी कंपनी को दोषी पाया गया, तो उसके वीजा आवेदन रद्द किए जाएंगे और भविष्य में उन्हें वीजा प्रायोजन (Visa Sponsorship) की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे भारतीय आईटी सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि कई भारतीय कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों के लिए सेवाएं प्रदान करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ट्रंप की “America First” नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे विदेशी वीजा कार्यक्रमों की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना चाहते हैं। वहीं, कुछ उद्योग संगठन इसे अमेरिकी टेक सेक्टर के लिए चुनौती मान रहे हैं क्योंकि विदेशी विशेषज्ञों की कमी से कई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।



