
आज भारतीय न्याय संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन और फॉरेंसिक साक्ष्यों के सुदृढ़ व वैज्ञानिक उपयोग से अपराधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई संभव हो पाई है। आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों जैसे डीएनए विश्लेषण, डिजिटल फॉरेंसिक, फिंगरप्रिंट और वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह ने जांच प्रक्रिया को अधिक मजबूत और निष्पक्ष बनाया है।
फॉरेंसिक आधारित जांच प्रणाली के कारण गंभीर और संगठित अपराधों में दोषसिद्धि की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे न केवल अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाने में सफलता मिली है, बल्कि न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ी है। यह व्यवस्था पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने और समाज में कानून के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रही है।



