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यूपी विधानसभा में आज पेश होगा राजकोषीय घाटा विधेयक, GSDP का 3% तय लक्ष्य

उत्तर प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत और अनुशासित बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। यूपी विधानसभा में राजकोषीय घाटा विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 प्रतिशत तक राजकोषीय घाटा सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि नियंत्रित राजकोषीय घाटा न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की वित्तीय साख को भी मजबूत करेगा।

राजकोषीय घाटा वह स्थिति होती है जब सरकार का कुल व्यय उसकी कुल आय से अधिक हो जाता है। ऐसे में सरकार को कर्ज लेना पड़ता है, जिससे ब्याज का बोझ बढ़ता है। 3 प्रतिशत की सीमा तय कर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी उसकी प्राथमिकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केंद्र सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (FRBM) नीति के अनुरूप है।

यूपी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश किए हैं। ऐसे में राजकोषीय संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन आवश्यक भी है। सरकार का दावा है कि बढ़ती जीएसडीपी, कर संग्रह में सुधार और निवेश के नए अवसरों के चलते राज्य की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसी के आधार पर घाटे को 3 प्रतिशत के भीतर रखने की रणनीति बनाई गई है।

विपक्ष इस विधेयक पर सरकार से पारदर्शिता और व्यय प्रबंधन को लेकर सवाल उठा सकता है, जबकि सरकार इसे आर्थिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो आने वाले वित्तीय वर्षों में यूपी की आर्थिक नीतियों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। कुल मिलाकर, यह विधेयक राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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