
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट में हुए हंगामे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कार्यक्रम के दौरान उठे विवाद के बाद बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “कपड़े उतारने से विचारधारा नहीं बदलती।” उनके इस बयान को कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है। पूनावाला का कहना था कि कुछ राजनीतिक दल आधुनिक तकनीक और नवाचार की बात तो करते हैं, लेकिन उनकी सोच और नीतियां पुरानी राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रही हैं।
AI समिट का मकसद तकनीकी विकास, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल इंडिया जैसे मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन मंच पर हुई तीखी बहस ने पूरे कार्यक्रम का फोकस बदल दिया। कांग्रेस नेताओं ने पूनावाला के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और स्तरहीन करार दिया। उनका कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करती है। वहीं बीजेपी का पक्ष है कि बयान का संदर्भ राजनीतिक विचारधारा की स्थिरता से था, न कि किसी व्यक्तिगत टिप्पणी से।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तकनीक और AI जैसे गंभीर विषयों पर होने वाले मंचों का राजनीतिक अखाड़ा बन जाना चिंताजनक है। भारत तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर बढ़ रहा है और सरकारें AI को भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ मान रही हैं। ऐसे में इस तरह के विवाद मूल मुद्दों से ध्यान भटका देते हैं।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला ट्रेंड कर रहा है। समर्थक और विरोधी अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो कुछ इसे मर्यादा के खिलाफ मान रहे हैं। फिलहाल इस बयान ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी की जंग को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद केवल शब्दों तक सीमित रहता है या फिर संसद और अन्य मंचों तक भी पहुंचता है।



