
पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है, जिसका सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ रहा है। रावलपिंडी में इलाज की लागत में लगभग 500% तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे मरीजों के लिए इलाज कराना बेहद मुश्किल हो गया है। दवाइयों की कीमतें भी कई गुना बढ़ चुकी हैं, जिसके कारण लोग जरूरी दवाएं खरीदने में असमर्थ हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों की कमी इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।
पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का सीधा असर स्वास्थ्य क्षेत्र पर साफ दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में इलाज के खर्च में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। निजी अस्पतालों के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में भी दवाइयों की कमी और महंगे इलाज की समस्या सामने आ रही है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई मरीज इलाज बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं के आयात में आई कमी, डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की गिरावट और सप्लाई चेन में बाधाओं ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह स्वास्थ्य संकट और भी विकराल रूप ले सकता है।



