
लखनऊ स्थित King George’s Medical University में चिकित्सा उपकरणों और लेंस की खरीद को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला चर्चा में है। आरोप है कि बाजार में लगभग 6 हजार रुपये में उपलब्ध एक लेंस को बाहरी आपूर्तिकर्ता के माध्यम से करीब 18 हजार रुपये में खरीदा गया। इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। आरोपों के अनुसार, कुछ मामलों में उपकरणों और लेंस की खरीद वास्तविक बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर की गई, जिससे सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही होगी।
मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और विभागों से जवाब मांगा गया है। जांच एजेंसियां खरीद से जुड़े दस्तावेजों, बिलों, आपूर्ति आदेशों और भुगतान रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही हैं। यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए, ताकि मरीजों के हितों की रक्षा हो सके और सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। फिलहाल सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाएगी।



