
Palakkad में स्थित एक फिटनेस सेंटर ने खुद को “इस्लाम-फ्रेंडली जिम” के रूप में पेश किया है, जिसके बाद यह चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, जिम में म्यूजिक न चलाने, पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग वर्कआउट समय निर्धारित करने तथा शालीन (modest) ड्रेस कोड अपनाने जैसे नियम प्रस्तावित किए गए हैं।
जिम प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था उन लोगों के लिए बनाई गई है जो धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप फिटनेस गतिविधियों में भाग लेना चाहते हैं। प्रबंधन के अनुसार, कई लोग मिश्रित (mixed) जिम वातावरण या तेज संगीत के कारण पारंपरिक जिम का उपयोग नहीं करते, इसलिए उन्हें एक वैकल्पिक विकल्प देने का प्रयास किया गया है।
विवाद तब बढ़ा जब सोशल मीडिया पर जिम के प्रचार से जुड़े वीडियो और नियमों की जानकारी वायरल हुई। आलोचकों ने इसे सामाजिक रूप से अलगावकारी या रूढ़िवादी कदम बताया, जबकि समर्थकों का तर्क है कि निजी व्यवसायों को अपने ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार सेवाएं प्रदान करने का अधिकार है।
बढ़ती आलोचना के बाद जिम के मालिक ने स्पष्ट किया कि सदस्यता किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है और सभी लोग जिम में आ सकते हैं, बशर्ते वे वहां के निर्धारित नियमों का पालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि “इस्लाम-फ्रेंडली” शब्द जिम के संचालन के तरीके को दर्शाता है, न कि यह कि जिम केवल किसी विशेष समुदाय के लिए है।
यह मामला अब धार्मिक स्वतंत्रता, निजी व्यवसायों की स्वायत्तता, महिलाओं की पसंद और सार्वजनिक जीवन में सांस्कृतिक-धार्मिक मान्यताओं की भूमिका जैसे व्यापक मुद्दों पर बहस का हिस्सा बन गया है। फिलहाल इस विषय पर सोशल मीडिया और विभिन्न समुदायों में चर्चा जारी है।



