नई सड़क और आबादी के पास जमीन खरीदना होगा महंगा, 50% तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क का प्रस्ताव

नई सड़कों और तेजी से विकसित हो रही आबादी के आसपास जमीन खरीदने वालों को भविष्य में अधिक खर्च करना पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसी जमीनों के पंजीकरण पर 20 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है। इस कदम का उद्देश्य विकास परियोजनाओं से बढ़ने वाले भूमि मूल्य का आंशिक लाभ राजस्व के रूप में प्राप्त करना बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, नई सड़क, हाईवे, बाईपास या अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के आसपास जमीनों की कीमतों में तेजी से वृद्धि होती है। इसी तरह विकसित आवासीय क्षेत्रों और बढ़ती आबादी के निकट स्थित भूमि का बाजार मूल्य भी सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक होता है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
प्रस्ताव लागू होने पर भूमि खरीदने वाले व्यक्तियों, निवेशकों और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जमीन खरीद की कुल लागत बढ़ेगी, हालांकि सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना भी बनेगी।
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि अतिरिक्त स्टांप शुल्क से निवेशकों की लागत बढ़ सकती है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि विकास परियोजनाओं से मिलने वाले आर्थिक लाभ का एक हिस्सा सार्वजनिक राजस्व में भी आना चाहिए। इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों की राय सामने आ रही है।
फिलहाल प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है और अंतिम निर्णय के बाद ही नई दरों एवं नियमों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो नई सड़क और विकसित आबादी के आसपास जमीन खरीदना पहले की तुलना में अधिक महंगा साबित हो सकता है।



