
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि AI तकनीक में होने वाली गलतियों, जोखिमों और संभावित दुरुपयोग को केवल कड़े नियामकीय ढांचे के जरिए पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
सान्याल के अनुसार AI एक तेजी से विकसित होने वाली तकनीक है, जिसकी क्षमताएं और उपयोग के क्षेत्र लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में अत्यधिक सख्त नियम नवाचार और तकनीकी प्रगति की गति को भी प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने संतुलित और व्यावहारिक नियामकीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए तकनीकी सुधार, उद्योग की जवाबदेही, पारदर्शिता, मानव निगरानी और डिजिटल साक्षरता जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI से जुड़े जोखिमों में गलत जानकारी का प्रसार, एल्गोरिदमिक पक्षपात, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियां शामिल हैं। इन मुद्दों से निपटने के लिए सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक माना जा रहा है।
संजीव सान्याल ने यह भी संकेत दिया कि भारत को AI क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिम्मेदार उपयोग की दिशा में संतुलन बनाना होगा। उनका मानना है कि अत्यधिक प्रतिबंधों की बजाय बेहतर मानकों और जवाबदेह तकनीकी विकास पर ध्यान केंद्रित करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
दुनियाभर में AI के नियमन को लेकर बहस जारी है। कई देश इस तकनीक के लिए नए नियम और नीतियां तैयार कर रहे हैं, जबकि उद्योग जगत नवाचार को बाधित किए बिना सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। भारत भी AI नीति और डिजिटल शासन के क्षेत्र में संतुलित ढांचा विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।



