भानु सप्तमी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

सनातन धर्म में भानु सप्तमी का विशेष महत्व बताया गया है। यह दिन सूर्य देव की आराधना और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तब उसे भानु सप्तमी कहा जाता है। इस अवसर पर सूर्य उपासना करने से स्वास्थ्य, यश, ऊर्जा और सफलता की प्राप्ति होने की मान्यता है।
इस वर्ष भानु सप्तमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, जप-तप और नए कार्यों की शुरुआत शुभ फल प्रदान कर सकती है। हालांकि विभिन्न पंचांगों के अनुसार मुहूर्त में स्थान और समय के आधार पर अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग का भी अवश्य ध्यान रखें।
भानु सप्तमी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। जल में लाल फूल, अक्षत और रोली मिलाकर अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र, गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्रों का जाप किया जाता है। इस दिन लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़ और तांबे से संबंधित वस्तुओं का दान भी पुण्यदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान स्वच्छता, सात्विक आहार और संयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सूर्य देव को अर्घ्य देते समय उगते सूर्य की ओर मुख करके श्रद्धा और एकाग्रता से प्रार्थना करनी चाहिए। माना जाता है कि भानु सप्तमी पर की गई सूर्य उपासना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करती है तथा व्यक्ति को कठिनाइयों से उबरने की शक्ति प्रदान करती है।



