
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ग्रीन कार्ड धारकों, विशेष रूप से आपराधिक आरोपों या रिकॉर्ड वाले लोगों के लिए नई कानूनी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि सीमा अधिकारी किसी ग्रीन कार्ड धारक को अमेरिका लौटते समय केवल आपराधिक आरोपों के आधार पर भी “प्रवेश चाहने वाले” व्यक्ति के रूप में मान सकते हैं। इसके लिए अधिकारियों को पहले की तरह उच्च स्तर के सबूत पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी।
यह मामला ग्रीन कार्ड धारक मुक चोई लाउ (Muk Choi Lau) से जुड़ा था, जिन्हें विदेश यात्रा से लौटने पर लंबित आपराधिक आरोपों के कारण विशेष इमिग्रेशन प्रक्रिया में रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला देते हुए स्पष्ट किया कि सीमा अधिकारियों को प्रारंभिक स्तर पर अपराध साबित करने के लिए “स्पष्ट और ठोस सबूत” की बाध्यता नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद ऐसे ग्रीन कार्ड धारकों के लिए विदेश यात्रा अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है, जिन पर कोई लंबित मामला है या जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। अमेरिका लौटते समय उन्हें अतिरिक्त पूछताछ, हिरासत या निर्वासन संबंधी कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यह फैसला स्वतः किसी ग्रीन कार्ड धारक को निर्वासित नहीं करता, लेकिन सरकार के लिए कार्रवाई शुरू करना पहले की तुलना में आसान हो सकता है।
फैसले का विरोध करने वाले न्यायाधीशों ने चेतावनी दी कि इससे ग्रीन कार्ड धारकों के अधिकार कमजोर हो सकते हैं और वे लंबे समय तक कानूनी अनिश्चितता में फंस सकते हैं। वहीं इमिग्रेशन विशेषज्ञ ऐसे लोगों को विदेश यात्रा से पहले कानूनी सलाह लेने की सलाह दे रहे हैं, खासकर यदि उनके खिलाफ कोई लंबित आरोप, पुराना आपराधिक मामला या न्यायिक विवाद मौजूद हो।



