क्या होता है ‘गो डार्क’ जहाज?

ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान भारत की ओर आने वाले कई व्यापारिक जहाजों के ‘गो डार्क’ (Go Dark) होने की खबरें सामने आईं। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इसका अर्थ होता है कि जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) अस्थायी रूप से बंद कर देता है या उसकी लोकेशन सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देती।
AIS एक अंतरराष्ट्रीय ट्रैकिंग प्रणाली है, जिसके माध्यम से जहाज अपनी पहचान, स्थिति, दिशा और गति जैसी जानकारी प्रसारित करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह प्रणाली टक्कर से बचाव और समुद्री यातायात प्रबंधन के लिए उपयोग की जाती है। हालांकि, युद्ध, समुद्री डकैती या सुरक्षा संबंधी खतरे वाले क्षेत्रों में कुछ जहाज अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए सीमित अवधि के लिए ‘गो डार्क’ रणनीति अपनाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ने पर जहाज परिचालक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाते हैं। हालांकि, AIS को बंद करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत सामान्य प्रक्रिया नहीं है और इसे केवल विशेष सुरक्षा परिस्थितियों में ही अपनाया जाता है। कई मामलों में जहाज संबंधित समुद्री प्राधिकरणों और नौसैनिक एजेंसियों के साथ संपर्क बनाए रखते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, ‘गो डार्क’ होने का मतलब यह नहीं है कि जहाज लापता हो गया है, बल्कि कई बार यह संभावित खतरे से बचने के लिए अपनाया गया एक सुरक्षा उपाय होता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में समुद्री निगरानी और जोखिम मूल्यांकन की चुनौती भी बढ़ जाती है।
अस्वीकरण: यह रिपोर्ट सार्वजनिक समुद्री सुरक्षा विश्लेषण और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी विशेष जहाज द्वारा AIS बंद करने के कारण अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।



