हमलावर तेंदुओं पर नई नीति

मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने हमलावर तेंदुओं के प्रबंधन को लेकर नई रणनीति तैयार की है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ऐसे तेंदुए जो बार-बार मानव बस्तियों में घुसकर लोगों पर हमला करते हैं या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बनते हैं, उन्हें जंगल में दोबारा छोड़ने के बजाय रेस्क्यू सेंटर या मान्यता प्राप्त चिड़ियाघरों में रखा जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है। नई व्यवस्था के तहत किसी तेंदुए को हमलावर घोषित करने से पहले वन विभाग उसके व्यवहार, घटनाओं के रिकॉर्ड और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन करेगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तेंदुए उम्र, चोट, भोजन की कमी या आवास क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप के कारण मानव बस्तियों की ओर आने लगते हैं। ऐसे मामलों में केवल पकड़कर दूसरे जंगल में छोड़ना हमेशा प्रभावी समाधान नहीं माना जाता, क्योंकि कई तेंदुए दोबारा आबादी वाले क्षेत्रों में लौट आते हैं।
नई रणनीति के तहत रेस्क्यू सेंटरों की क्षमता बढ़ाने, वन अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों के वैज्ञानिक और मानवीय प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध सरकारी मसौदों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम दिशा-निर्देश संबंधित मंत्रालय और वन्यजीव प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार लागू होंगे।



