अर्ली मेनोपॉज की बढ़ती समस्या, हर 14 में से 1 महिला प्रभावित: स्टडी

एक नई स्टडी में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। रिसर्च के अनुसार कम और मध्यम आय वाले देशों में 30 से 49 वर्ष की लगभग हर 14 में से 1 महिला अर्ली मेनोपॉज की समस्या से प्रभावित हो रही है। अध्ययन में 44 देशों की 7 लाख से अधिक महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
अर्ली मेनोपॉज का मतलब सामान्य उम्र से पहले मासिक धर्म का बंद हो जाना है। शोध में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में इसका खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा गया। शिक्षा, रोजगार और बेहतर सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे कारकों का संबंध भी इसके जोखिम से जुड़ा पाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले मेनोपॉज होने पर महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के साथ हड्डियों की कमजोरी, हृदय संबंधी समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। भारत में भी शुरुआती मेनोपॉज को लेकर कई अध्ययनों में इसके कारणों और प्रभावों पर चर्चा की गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पीरियड्स में अचानक बदलाव, हॉट फ्लैश, नींद की समस्या या अन्य हार्मोनल लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर पहचान और उचित देखभाल से इसके प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता है।



