
कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान पद्म श्री सम्मानित शिक्षाविद् और समाजसेवी हरेकला हजब्बा को वोटर लिस्ट में नाम के अंतर को लेकर नोटिस जारी किया गया। पुराने 2002 के मतदाता रिकॉर्ड में उनका नाम केवल ‘Hajabba’ दर्ज था, जबकि मौजूदा आधार, राशन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी और पद्म श्री से जुड़े दस्तावेजों में नाम ‘Harekala Hajabba’ है। अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद मामले को सुलझा दिया और नोटिस वापस ले लिया।
2002 की वोटर लिस्ट में सिर्फ ‘Hajabba’ नाम
SIR के दौरान पुराने और मौजूदा चुनावी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया में हरेकला हजब्बा के नाम में अंतर सामने आया।
2002 की मतदाता सूची में उनका नाम केवल ‘Hajabba’ दर्ज था। वहीं बाद के आधिकारिक दस्तावेजों में उनका पूरा नाम ‘Harekala Hajabba’ दर्ज है। इसी अंतर के चलते चुनाव अधिकारियों ने नोटिस जारी किया था।
आधार से पद्म श्री सर्टिफिकेट तक पूरा नाम
हरेकला हजब्बा के मौजूदा पहचान दस्तावेजों में उनका नाम Harekala Hajabba दर्ज है। इनमें आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट और नया वोटर आईडी शामिल हैं।
इसके अलावा 2020 में उन्हें मिले पद्म श्री पुरस्कार से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड में भी यही नाम दर्ज है।
घर पहुंचकर अधिकारियों ने किया सत्यापन
नोटिस मिलने के बाद हजब्बा को संबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया था। बाद में स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने उनके घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन किया।
दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन के अनुसार आवश्यक रिकॉर्ड जुटाने और जांच के बाद विसंगति दूर कर दी गई तथा नोटिस वापस ले लिया गया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में बरकरार रहेगा।
कौन हैं हरेकला हजब्बा?
हरेकला हजब्बा कर्नाटक के मंगलुरु क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवी और शिक्षा कार्यकर्ता हैं। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले हजब्बा ने अपनी कमाई से गांव में बच्चों के लिए स्कूल शुरू करने का सपना पूरा किया।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2020 में पद्म श्री से सम्मानित किया था।
SIR क्या है?
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची की गहन जांच और पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चुनावी रिकॉर्ड को अपडेट करना और मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है।
कर्नाटक में इस प्रक्रिया के दौरान पुराने चुनावी रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों के बीच अंतर पाए जाने पर मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। हरेकला हजब्बा का मामला भी इसी सत्यापन प्रक्रिया के दौरान सामने आया।
नोटिस पर तुरंत हुआ समाधान
हरेकला हजब्बा के मामले में शुरुआती तौर पर नोटिस जारी हुआ, लेकिन दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी। अधिकारियों के घर पहुंचकर सत्यापन करने और नोटिस वापस लेने से मामला जल्द ही सुलझ गया।
पद्म श्री पुरस्कार विजेता हरेकला हजब्बा को SIR के दौरान वोटर लिस्ट में नाम के अंतर के कारण नोटिस मिला था। 2002 के रिकॉर्ड में उनका नाम केवल ‘Hajabba’ था, जबकि मौजूदा दस्तावेजों में ‘Harekala Hajabba’ दर्ज है। अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद विसंगति दूर कर दी और नोटिस वापस ले लिया।



