MBBS फर्जीवाड़े में लेखपालों की भूमिका पर सवाल, पुरानी शिकायतें भी जांच में
देहरादून में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से MBBS दाखिले के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले की जांच अब प्रमाणपत्र तैयार करने और सत्यापन की सरकारी प्रक्रिया तक पहुंच गई है। एसआईटी राजस्व विभाग से जुड़े स्तरों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच के दौरान दो लेखपालों से जुड़ी पुरानी शिकायतें भी सामने आई हैं। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि आवेदन से लेकर सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी होने तक दस्तावेज किन-किन स्तरों से गुजरे और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
MBBS फर्जीवाड़े की जांच में नया मोड़
देहरादून में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर MBBS दाखिले के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। शुरुआती जांच में चार दाखिले रद्द किए गए थे। अब एसआईटी का फोकस केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि ये दस्तावेज सरकारी प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में कैसे शामिल हुए।
लेखपालों की भूमिका भी जांच के दायरे में
प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया में राजस्व विभाग के स्तर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी वजह से एसआईटी अब पटवारी और लेखपाल स्तर से लेकर एसडीएम और एडीएम कार्यालय तक की प्रक्रिया की जांच कर रही है। अधिकारियों के बयान और संबंधित पत्रावलियों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुरानी शिकायतों की फाइलें भी खुलीं
जांच के दौरान दो लेखपालों के खिलाफ पहले की शिकायतों का भी जिक्र सामने आया है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, इन शिकायतों में मुख्यमंत्री पोर्टल और जिलाधिकारी कार्यालय तक की गई शिकायतें शामिल हैं। अब यह सवाल जांच का हिस्सा है कि उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके पीछे क्या कारण रहे।
चार MBBS दाखिले पहले ही रद्द
इस मामले में चार अभ्यर्थियों ने एक ही स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा के नाम से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आश्रित प्रमाणपत्र हासिल किए थे। जांच में संबंधित स्वतंत्रता सेनानी का नाम प्रशासन की रिकॉर्ड पंजिका में नहीं मिला। इसके अलावा आवेदनों में दिए गए पतों और अन्य दस्तावेजों में भी विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद चारों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए और MBBS दाखिले भी रद्द कर दिए गए।
सरकारी रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया की पड़ताल
एसआईटी ने एसडीएम सदर और एडीएम कार्यालय से संबंधित पत्रावलियां कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। जांच में यह देखा जा रहा है कि आवेदन जमा होने के बाद किस स्तर पर सत्यापन हुआ, किस अधिकारी या कर्मचारी ने रिपोर्ट तैयार की और किस आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा
MBBS दाखिले की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए ऑनलाइन आवेदन, अपलोड किए गए दस्तावेज, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसे डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनका मिलान प्रमाणपत्रों और राजस्व विभाग की पत्रावलियों से किया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया की कड़ी को समझा जा सके।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल लेखपालों या अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार हुए, उनका सत्यापन कैसे हुआ और प्रमाणपत्र जारी होने तक किन-किन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका रही।



