UP Politics: बुलडोजर को लेकर BJP और सपा की अलग-अलग रणनीति
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच बुलडोजर को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी की अलग-अलग रणनीतियां चर्चा में हैं। जागरण के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली दौरे के दौरान बुलडोजर के स्वागत के बीच इसे ‘वोट का बुलडोजर’ कहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान बुलडोजर को अपराध और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े संदेश के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया था। हालांकि, वर्तमान में भाजपा की ओर से बुलडोजर प्रतीक को लेकर किसी नई आधिकारिक रणनीति की घोषणा नहीं हुई है।
वहीं समाजवादी पार्टी बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाती रही है। पार्टी की ओर से इसे कथित तौर पर सत्ता के दुरुपयोग और पीडीए से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में उठाया गया है। अखिलेश यादव की ओर से बुलडोजर के राजनीतिक इस्तेमाल का नया संदेश देने की कोशिश रिपोर्ट में दर्ज की गई है।
इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ दौरे के दौरान बुलडोजर से स्वागत किए जाने की घटना भी चर्चा में रही। रिपोर्ट के अनुसार, वह वहां नहीं रुके और इसके बाद उनके अन्य स्वागत कार्यक्रमों में बुलडोजर दिखाई नहीं दिए। हालांकि, इस घटनाक्रम को भाजपा की आधिकारिक नीति में बदलाव मानने की पुष्टि नहीं हुई है।
बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामले अदालतों तक भी पहुंचे हैं और विभिन्न मामलों में न्यायालयों की ओर से निर्देश जारी हुए हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुलडोजर अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े संदर्भ में नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के संदेश और अभियान में भी दिखाई दे रहा है।



