Jaishankar on US: बदलती वैश्विक शक्ति व्यवस्था पर बड़ा बयान

जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका का “radical repositioning” और चीन का उदय दो प्रमुख बदलाव हैं। उनके मुताबिक अमेरिका ने अपनी वैश्विक भूमिका में ऐसा बदलाव किया है, जिसे उन्होंने “deliberately a lonelier power” बनने के संदर्भ में समझाया। साथ ही अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा का असर व्यापक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर पड़ रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियां अब अपनी जरूरतों के अनुसार सहयोग, विविधीकरण और जोखिम कम करने की रणनीति अपना रही हैं। उन्होंने कहा कि देशों को हर मुद्दे पर समान विचार रखने की जरूरत नहीं है, बल्कि साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग के आधार पर नई साझेदारियां विकसित की जा सकती हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर जयशंकर ने बताया कि भारत केवल बातचीत और कूटनीति की वकालत तक सीमित नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क कर रहा है। इन बातचीत में ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात तथा संभावित गैर-हमला व्यवस्थाओं जैसे मुद्दे शामिल हैं।
जयशंकर ने भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अब रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु सहयोग और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक भूमिका बढ़ने के साथ उसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी।



