
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग से संबंधित फैसलों का रिकॉर्ड पेश करने को कहा है, ताकि यह देखा जा सके कि विवादित निर्णय सर्वसम्मति, बहुमत या केवल CEC के स्तर पर लिए गए थे। अदालत ने संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड से कानून के अनुरूप प्रक्रिया का पालन नहीं होने की बात सामने आती है तो संबंधित फैसलों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
याचिकाओं में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े फैसलों, दिशानिर्देशों और Form 6 में बदलाव सहित कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए, जबकि चुनाव आयोग ने पहले कहा है कि उसके आदेश वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप हैं।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक और संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। भाजपा की ओर से कहा गया कि अदालत में याचिका पर सुनवाई और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी होना इस बात का संकेत है कि देश में संस्थाएं अपने निर्धारित तरीके से काम कर रही हैं।
वहीं, विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है। कांग्रेस ने CEC पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी अदालत की आगे की सुनवाई और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा।



