यूपी में बनेगा ग्रीन फ्यूल, भूसे और खोई से उड़ेंगे हवाई जहाज

उत्तर प्रदेश में ग्रीन फ्यूल उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। राज्य में भूसे, गन्ने की खोई और दूसरे कृषि अवशेषों से जैव ईंधन तैयार करने की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इन संसाधनों का इस्तेमाल करके टिकाऊ विमानन ईंधन यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। इससे कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग होने के साथ हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
क्या है यूपी की ग्रीन फ्यूल नीति 2026?
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ग्रीन फ्यूल से जुड़े निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीति को मंजूरी दी गई है। रिपोर्ट में 10 साल तक बिजली शुल्क में छूट का भी उल्लेख है। इस तरह के प्रोत्साहन का उद्देश्य जैव ईंधन उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं को आकर्षित करना और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उद्योग का विस्तार करना है। छूट की पात्रता और शर्तें संबंधित सरकारी आदेश के अनुसार लागू होंगी।
भूसे और गन्ने की खोई से कैसे बनेगा ईंधन?
फसल कटाई के बाद बचने वाला भूसा और चीनी मिलों से निकलने वाली गन्ने की खोई बायोमास के प्रमुख स्रोत हैं। तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए इनसे जैव ईंधन और दूसरे उपयोगी ऊर्जा उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। विमानन क्षेत्र के लिए उपयुक्त ईंधन बनाने में विशेष प्रसंस्करण और गुणवत्ता मानकों का पालन करना जरूरी होता है। इसलिए हर प्रकार का कृषि अवशेष सीधे विमान के ईंधन में नहीं बदला जा सकता।
किसानों को कैसे मिल सकता है फायदा?
कृषि अवशेषों की मांग बढ़ने पर किसानों को भूसे और अन्य उपयोगी अवशेषों के विपणन का अतिरिक्त अवसर मिल सकता है। इससे फसल के बाद बचने वाले पदार्थों का आर्थिक उपयोग बढ़ सकता है। हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ कितना होगा, यह स्थानीय खरीद व्यवस्था, परिवहन लागत, अवशेषों की उपलब्धता और कंपनियों द्वारा तय खरीद मूल्य पर निर्भर करेगा।
प्रदूषण कम करने में भी मदद की संभावना
कृषि अवशेषों का उपयोगी प्रसंस्करण होने से कुछ क्षेत्रों में उन्हें खुले में जलाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे वायु प्रदूषण घटाने में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अवशेषों को किस तरह इकट्ठा किया जाता है, प्रसंस्करण में कितनी ऊर्जा लगती है और तैयार ईंधन का जीवन-चक्र उत्सर्जन कितना है।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
ग्रीन फ्यूल परियोजनाओं के लिए उत्पादन इकाइयों, संग्रह केंद्रों, परिवहन और प्रसंस्करण सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इनके विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय कारोबार के अवसर बन सकते हैं। नीति के प्रभाव का आकलन वास्तविक निवेश, स्थापित उत्पादन क्षमता और परियोजनाओं के चालू होने के बाद ही किया जा सकेगा।
निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में ग्रीन फ्यूल उत्पादन की पहल कृषि अवशेषों को ऊर्जा संसाधन में बदलने का अवसर दे सकती है। इससे किसानों, उद्योगों और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को संभावित लाभ मिल सकता है। हालांकि, किसानों की कमाई और विमानन ईंधन के उत्पादन से जुड़े वास्तविक परिणाम परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।



