इन्फोसिस को बड़े परिचालन असर की आशंका नहीं

इन्फोसिस ने शेयर बाजारों को दी गई नियामकीय सूचना में कहा कि अमेरिका के PERM कार्यक्रम से निलंबन के फैसले का उसके संगठन पर कोई बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है। कंपनी ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग और संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर उनके सवालों और चिंताओं का समाधान करने के लिए तैयार है।
क्या है अमेरिका का PERM प्रोग्राम?
PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिकी श्रम विभाग की वह प्रक्रिया है, जिसके तहत नियोक्ता विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी पर रखने के लिए श्रम प्रमाणन प्राप्त करते हैं। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में यह एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है। इस कार्यक्रम पर रोक लगने से प्रभावित कंपनियां निलंबन लागू रहने तक संबंधित नए आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी।
TCS और HCL के आवेदन भी घटे
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, TCS ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में केवल दो PERM आवेदन दाखिल किए, जबकि 2025 में 513 और 2024 में 1,804 आवेदन किए गए थे। HCL Technologies ने 2026 में 59 आवेदन दाखिल किए, जबकि 2025 में यह संख्या 323 थी। इन्फोसिस ने 2024 में 87 आवेदन किए थे। इन आंकड़ों के आधार पर भारतीय आईटी कंपनियों के परिचालन पर तत्काल प्रत्यक्ष असर सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिका ने कई बड़ी टेक कंपनियों को किया निलंबित
अमेरिकी प्रशासन ने PERM कार्यक्रम से कई बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को निलंबित करने की घोषणा की। इनमें इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, HCL Technologies, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी के नाम शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और घरेलू कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को कार्रवाई का कारण बताया है। ये आरोप अमेरिकी प्रशासन के हैं; कंपनियों पर लागू कार्रवाई और उसके परिणाम संबंधित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेंगे।
भारतीय आईटी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड पर क्या असर होगा?
PERM आवेदन दाखिल करने पर रोक से उन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिनके नियोक्ता को अभी श्रम प्रमाणन के लिए आवेदन करना है। इससे कुछ कर्मचारियों के स्थायी निवास की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। हालांकि, इसका असर हर कर्मचारी पर समान नहीं होगा। जिनकी प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है, उनकी स्थिति अलग हो सकती है। H-1B वीजा पर रहने वाले कर्मचारियों के लिए भी प्रभाव उनकी व्यक्तिगत इमिग्रेशन स्थिति और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
स्थानीय कर्मचारियों और अमेरिकी टेक केंद्रों में निवेश पर जोर
इन्फोसिस ने कहा कि उसने अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती और प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केंद्रों के विकास में निवेश किया है। कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों, ग्राहकों और समुदायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी के मुताबिक, वह लागू कानूनों का पालन करते हुए अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग करेगी।



