कनाडा में खालिस्तान मुद्दे पर भारतीय उच्चायुक्त का बड़ा बयान

कनाडा में खालिस्तान के मुद्दे पर बोलते हुए भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राजनीतिक राय रखना लोगों का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को खालिस्तान के समर्थन या विरोध में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से राजनीतिक आपत्ति नहीं है। हालांकि, इस अभिव्यक्ति के नाम पर हिंसा और आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
हिंसा और संगठित अपराध पर चिंता
पटनायक ने हथियारों की तस्करी, जबरन वसूली, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसी गतिविधियों को राजनीतिक आंदोलन से अलग रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण राजनीतिक समर्थन को हिंसक गतिविधियों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भारत की चिंता कनाडा की धरती से संचालित ऐसी गतिविधियों को लेकर है, जिन्हें भारतीय पक्ष सुरक्षा के लिए चुनौती मानता है।
प्रधानमंत्री की हत्या से जुड़े पोस्टरों पर आपत्ति
भारतीय उच्चायुक्त ने सार्वजनिक प्रदर्शनों में प्रधानमंत्री की हत्या को दर्शाने वाले पोस्टरों और हिंसा का महिमामंडन करने वाली सामग्री पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। यह बयान कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तान जनमत संग्रह से पहले आया है।
पटनायक ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरे सिख समुदाय को कुछ चरमपंथी तत्वों की गतिविधियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण राजनीतिक विचार रखने वाले लोगों और हिंसा या संगठित अपराध में शामिल व्यक्तियों के बीच अंतर करने की आवश्यकता बताई। यह मुद्दा कनाडा में भारतीय मूल के लोगों और सिख समुदाय को लेकर होने वाली चर्चाओं के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
भारत-कनाडा संबंध सुधारने की कोशिश
वर्ष 2023 में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में गंभीर तनाव आया था। कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस मामले में भारतीय एजेंटों की संभावित भूमिका के आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने खारिज कर दिया था। हाल के महीनों में दोनों देशों ने राजनयिक संवाद और सुरक्षा सहयोग को फिर से आगे बढ़ाने के प्रयास किए हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत भी जारी है।



