लेबनान से लौटेंगे UN के शांति सैनिक, 641 भारतीय जवान भी होंगे वापस

लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल यानी UNIFIL वर्ष 1978 से दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा और शांति बनाए रखने में भूमिका निभा रहा है। इसका काम इजरायल और लेबनान के बीच सीमा क्षेत्र की निगरानी करना, संघर्ष की स्थिति पर नजर रखना और संबंधित पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने में मदद करना है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अगस्त 2025 में मिशन को अंतिम बार बढ़ाने का फैसला किया था। इसके तहत मिशन 31 दिसंबर 2026 को अपना काम बंद करेगा और अगले वर्ष सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
641 भारतीय शांति सैनिकों की भी होगी वापसी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, UNIFIL में तैनात 641 भारतीय शांति सैनिक भी इस प्रक्रिया के तहत लेबनान से लौटेंगे। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैनिकों का योगदान देता रहा है। इन जवानों की वापसी मिशन की समग्र वापसी योजना का हिस्सा होगी। हालांकि, सैनिकों की वापसी का सटीक कार्यक्रम और चरणबद्ध विवरण संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार स्पष्ट होगा।
लेबनान मिशन को जारी रखने की मांग क्यों कर रहा है?
लेबनान सरकार चाहती है कि दक्षिणी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी बनी रहे। उसका मानना है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय निगरानी और संघर्ष रोकने के लिए संवाद की व्यवस्था जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के प्रमुख ने भी हाल में कहा है कि मिशन समाप्त होने से पहले भविष्य की व्यवस्था पर बातचीत और निर्णय आवश्यक हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि UNIFIL की जगह कोई नया संयुक्त राष्ट्र बल तैनात किया जाएगा या नहीं।
UNIFIL के जाने के बाद सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
मिशन की वापसी के बाद दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा की जिम्मेदारी लेबनानी सेना को सौंपने की योजना है। हालांकि, क्षेत्र में जारी तनाव और इजरायल-लेबनान सीमा की जटिल परिस्थितियों के कारण इस बदलाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। यूरोपीय संघ ने लेबनानी सेना और आंतरिक सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण तथा सहयोग देने के लिए एक अलग मिशन स्थापित करने पर भी सहमति जताई है। फिर भी, UNIFIL के बाद अंतरराष्ट्रीय निगरानी की व्यवस्था क्या होगी, इस पर अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण रहेगा।
मध्य पूर्व की सुरक्षा पर पड़ सकता है असर
UNIFIL की वापसी ऐसे समय हो रही है, जब दक्षिणी लेबनान में संघर्ष और सीमा सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। शांति सैनिकों की मौजूदगी समाप्त होने के बाद निगरानी, मानवीय सहायता और तनाव कम करने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। भारत के लिए भी अपने सैनिकों की सुरक्षित वापसी और संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के शांति अभियानों से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण होंगे।



