
भारतीय राजनीति में अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच किस प्रकार का संबंध है और क्या दोनों संगठनों में किसी प्रकार का मतभेद मौजूद है। लेकिन हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता और विचारक राम माधव ने इस विषय पर स्पष्ट रूप से बयान देते हुए कहा है कि भाजपा और आरएसएस के बीच किसी प्रकार का टकराव या मतभेद नहीं है। दोनों संगठन अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं और एक-दूसरे को सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
राम माधव ने कहा कि भाजपा एक राजनीतिक संगठन है जिसका लक्ष्य चुनावों में सफलता प्राप्त करना, सरकार बनाना और जनहित की नीतियों को लागू करना है। वहीं, आरएसएस एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है जो राष्ट्र निर्माण और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता लाने का कार्य करता है। इन दोनों की कार्यप्रणाली और कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं, लेकिन मूल विचारधारा और उद्देश्य राष्ट्रहित तथा समाजहित ही है।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर विपक्षी दल और कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह प्रचारित करने की कोशिश करते हैं कि भाजपा और आरएसएस के बीच खींचतान चल रही है। लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों संगठन एक-दूसरे के पूरक हैं। भाजपा को वैचारिक आधार और दिशा आरएसएस से मिलती है, वहीं आरएसएस को राजनीतिक मोर्चे पर भाजपा के माध्यम से अपनी सोच को क्रियान्वित करने का अवसर मिलता है।
राम माधव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की कार्यशैली तथा संगठनात्मक नीतियां आरएसएस के सिद्धांतों से ही प्रेरित हैं। दोनों का मकसद केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति और जनता के जीवन स्तर में सुधार करना है। यही कारण है कि आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है और आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह स्वाभाविक है कि किसी भी संगठन में विचार-विमर्श या अलग दृष्टिकोण सामने आ सकते हैं, लेकिन उसे मतभेद कहना गलत है। भाजपा और आरएसएस दोनों ही लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा को मानते हैं और हर स्तर पर मिलकर राष्ट्रहित में निर्णय लेते हैं।
इस बयान से यह स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा और आरएसएस के बीच मतभेद की खबरें केवल अफवाहों और राजनीतिक अटकलों पर आधारित हैं। असलियत यह है कि दोनों संगठन अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए एक साझा लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं – “भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाना।”



