
भारतीय वायुसेना (IAF) को जल्द ही 97 नए तेजस लड़ाकू विमान मिलने वाले हैं, जो भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील में शामिल है। यह सौदा न केवल भारत की सैन्य शक्ति को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की चिंताएं भी बढ़ा देगा। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस हल्का लड़ाकू विमान (LCA) अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर एवियोनिक्स, शक्तिशाली इंजन और मिसाइल क्षमता से लैस है। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जो भारत की आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस डील के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत और भी बढ़ जाएगी। तेजस विमान की खासियत यह है कि यह कम ऊँचाई पर भी आसानी से ऑपरेट कर सकता है और दुश्मन की सीमा में घुसकर सटीक हमला करने की क्षमता रखता है। इसकी गति, फुर्ती और अत्याधुनिक हथियार इसे पाकिस्तान के JF-17 और चीन के J-10 विमानों से कहीं ज्यादा उन्नत बनाती है। यही वजह है कि इस डील की खबर के बाद पाकिस्तान की हालत खराब होना तय है।
भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। राफेल विमानों की तैनाती के बाद अब तेजस की यह बड़ी खेप आने वाले समय में भारत को और भी आत्मनिर्भर बनाएगी। पाकिस्तान और चीन दोनों ही भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति से परेशान हैं क्योंकि इससे दक्षिण एशिया में भारत का दबदबा और मजबूत होगा। तेजस की तैनाती से सीमा पर भारत की निगरानी क्षमता बढ़ेगी और युद्ध की स्थिति में IAF को निर्णायक बढ़त मिलेगी।
इसके अलावा, इस सौदे का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि इससे घरेलू रक्षा उद्योग को नई ऊँचाई मिलेगी और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिफेंस एक्सपोर्ट हब’ की रणनीति के तहत तेजस विमान भविष्य में विदेशी बाजारों में भी बड़ी मांग हासिल कर सकते हैं।
संक्षेप में, 97 तेजस विमानों की यह डील भारतीय वायुसेना के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। यह सौदा न केवल भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि पाकिस्तान और चीन की नींद भी उड़ाकर रख देगा। आने वाले वर्षों में तेजस भारत की सुरक्षा और शक्ति का नया प्रतीक बनने जा रहा है।



