चंद्रग्रहण पर बंद रहेंगे रामलला के दर्शन | 8 सितंबर को सुबह पुनः होगा पूजन

हिन्दू धर्म में ग्रहण का विशेष धार्मिक महत्व है। चाहे वह सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण, दोनों अवसरों पर पूजा-अर्चना और मंदिर दर्शन की परंपराएँ प्रभावित होती हैं। आज दोपहर बाद लगने वाले चंद्रग्रहण के कारण अयोध्या समेत पूरे देश के प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। इससे भक्तों को रामलला के प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर नहीं मिलेगा। श्रद्धालुओं को पुनः 8 सितंबर की सुबह विशेष पूजन और दर्शन का लाभ मिल सकेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहणकाल को शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अशुभ माना जाता है। यही कारण है कि ग्रहण लगने से कुछ समय पहले ही मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी इसी परंपरा का पालन किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने जानकारी दी है कि चंद्रग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पूर्व से ही रामलला के दर्शन-पूजन स्थगित रहेंगे और मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
ग्रहणकाल में भगवान की मूर्तियों को कपड़े से ढक दिया जाता है और किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना, भोग या आरती का आयोजन नहीं होता। यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलता है। ग्रहण के दौरान भक्तों को मंत्र-जप और ध्यान करने की सलाह दी जाती है। यह माना जाता है कि ग्रहणकाल में किया गया जप और साधना सामान्य समय की तुलना में कई गुना फलदायी होती है।
चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू होती है। मंदिरों में विशेष स्नान, धूप-दीप और शुद्धिकरण मंत्रों का उच्चारण कर देवताओं का पुनः आवाहन किया जाता है। अयोध्या में भी 8 सितंबर की सुबह विशेष अनुष्ठानों के साथ मंदिर के पट खोले जाएंगे और भक्तजन फिर से रामलला के दर्शन कर सकेंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
खगोलविदों के अनुसार यह चंद्रग्रहण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका प्रभाव भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा। वहीं, ज्योतिष शास्त्र मानता है कि ग्रहण काल मनुष्य के मन और जीवन पर विशेष प्रभाव डालता है। इसीलिए इस समय भक्तों को अनावश्यक कार्यों से बचते हुए आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
समग्र रूप से देखें तो चंद्रग्रहण न केवल एक खगोलीय घटना है बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का भी अहम हिस्सा है। रामलला के दर्शन का इंतजार कर रहे भक्तों को थोड़ी देर जरूर करनी होगी, लेकिन ग्रहण समाप्त होने के बाद होने वाला विशेष पूजन और दर्शन का अनुभव भक्तों के लिए अधिक मंगलकारी सिद्ध होगा।



